विविध

ऋषिकेश: राफ्टिंग और कैंपिंग के शौकीन 01 सितंबर से फिर शुरू कर सकेंगे रोमांचक सफर

ऋषिकेश । रोमांच के शौकीनों के लिए 01 सितंबर से राफ्टिंग और कैंपिंग फिर से शुरू की जा रही है। हेंवघाटी, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र में संचालित कैंप फिर से चल सकेंगे। गंगा का जलस्तर बढ़ा तो 30 जून के बाद राफ्टिंग का संचालन बंद कर दिया गया था। जुलाई और अगस्त महीने में बरसात की वजह से पर्यटक पानी के रोमांचक खेलों और नदी किनारे लगे कैंपों से दूरी बना लेते हैं।

केदारनाथ धाम यात्रा में 15 अगस्त पर टूटा रिकॉर्ड

देहरादनू। 06 मई 2022 से केदारनाथ धाम यात्रा का शुभारंभ हुआ। सिर्फ छह दिनों में ही दर्शनार्थियों का आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया। अब केवल स्वतंत्रमता दिवस पर 9635 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर केदारनाथ यात्रा के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है।
इस यात्राकाल में केदार धाम के दर्शन करने वालों का आंकड़ा 10,080,83 पहुंच चुका है। ये अपने आप में एक नया रिकाॅर्ड है। पहले साल 2019 में 10,00021 श्रद्धालुओं ने केदारनाथ पहुंचकर बाबा के दर्शन किए थे।
यात्रा की शुरुआत के 26 दिन में ही 04 लाख से अधिक यात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन किए। जुलाई से 15 अगस्त तक डेढ़ महीने में ही धाम में 1,76,483 श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की बढ़ी संख्या की वजह से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अपनी रोजी रोटी चलाने के लिए पहले से ज्यादा रोजगार के साधन प्राप्त हुए।

मॉनसून के बाद फिर आ सकती है यात्रा में तेजी
केदारधाम यात्रा के संबंध में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि माॅनसून के बाद यात्रा में फिर तेजी आ सकती है। चारधामों में तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पहली बार स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा मार्गों पर नौ स्थानों पर हेल्थ स्क्रीनिंग शुरू की है।

पटियाला में उत्तराखंड समाज ने मनाया आजादी का अमृत महोत्सव, हिलाँस मंच के बच्चों ने पेश किया सांस्कृतिक कार्यक्रम

पटियाला| तर्कशील सभागार में उत्तराखंड हिलांस सांस्कृतिक कला मंच की ओर से आजादी के अमृत महोत्सव के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। नन्हे-मुन्ने बच्चे देशभक्ति और संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले बच्चों को मुख्य अतिथि उत्तराखंड के भाषाविद डॉ. बिहारीलाल जालंधरी, विशिष्ट अतिथि पूर्व पार्षद श्री ठारू राम, अतिथि श्री जसवीर सिंह व हरीचंद बंसल ने स्मृति चिन्ह देकर प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन समाजसेवी श्री प्रवीन लंगवाल ने रिबन काटकर तथा डॉ. बिहारीलाल जालंधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्हे उत्तराखंड हिलांस सांस्कृतिक कला मंच की ओर से विशेष तौर पर सम्मानित किया गया। डॉ. जालंधरी ने उपस्थितजनों को संबोधित करते कहा कि हमें अपने पैतृक गांव से जुड़कर रहना चाहिए। नहीं तो 2026 में होने वाले भू पैमाइश के अनुसार जिसका मकान और जमीन बंजर हो चुके होंगे, उन्हें सरकार अपने कब्जे में कर लेगी। तब प्रवास में स्थाई रूप से रहने वाले उतराखण्डी अपनी पैतृक जमीन से बेदखल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी को अपने घर दोस्तों रिश्तेदारों के साथ अपनी बोली भाषा में बात करनी चाहिए। छोटे-छोटे बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच बीच में सभी समितियों के अध्यक्षों ने अपनी बात रखी।
कार्यक्रम में पटियाला में उत्तराखंड समाज की सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया। जिसमें पौड़ी गढ़वाल सभा के प्रधान श्री बीरेन्द्र पटवाल, उत्तरांचल सभा के अध्यक्ष
श्री जोत सिंह भंडारी, राष्ट्रीय उत्तराखंड सभा पटियाला के अध्यक्ष श्री अशोक नेगी, जन कल्याण समिति की अध्यक्षा श्रीमती सरोज बिष्ट, यू.के. फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष श्री प्रदीप कठैत, एकता नगर सेवा समिति के अध्यक्ष श्री विजय सकलानी, परमार्थ कार्य सेवा समिति के अध्यक्ष पूरण सिंह जीना, खालसा नगर कीर्तन मंडली की अध्यक्षा श्रीमती भाना देवी के साथ सभी समितियों के सदस्य उपस्थित रहे।
मंच संचालन माधौ सिंह बिष्ट व कार्यक्रम का निर्देशन श्रीमती बिनीता चौहान ने किया। उत्तराखंड हिलांस सांस्कृतिक कला मंच के पदाधिकारियों में संयोजक माधो सिंह बिष्ट, चेयरमैन धीरज सिंह रावत, प्रधान हरी सिंह भंडारी, महासचिव बीर सिंह सेनवाल व दिनेश चौहान, जगदीश प्रसाद, गिरीश चंद्र, गरीब सिंह, विरेन्द्र सिंह, नन्दी शाही, कविता मेहरा, पूजा रावत, शीतल तड़ियाल, ममता देवी एवं बच्चों के अविभावक उपस्थित हुए।

हिलांस मंच के 15 वॉलंटियर्स ने राजिंदरा अस्पताल में लगाए कैंप में किया रक्तदान

पटियाला | उत्तराखंड हिलांस सांस्कृतिक कला मंच की ओर से प्रधान दिनेश सिंह चौहान की अध्यक्षता में रक्तदान कैंप आयोजित किया गया। इस दौरान 15 वॉलंटियर्स ने रक्तदान किया। रक्तदानियों में धीरेन्द्र सिंह राणा, अर्जुन कुमार, लखविंदर सिंह, राम सिंह, सुनील प्रधान, पूरन पांडे, गौरव रावत, रवीन्द्र सिंह, भूपेंद्र वैदोला, संदीप सिंह, कुलदीप सिंह, हरविंदर सिंह, मनोज कुमार, फरमान सिंह, रमेश कुमार शामिल रहे।
इस मौके पर चैयरमैन हरी सिंह भंडारी, मुख्य सलाहकार धीरज सिंह रावत, प्रधान दिनेश सिंह चौहान, उप प्रधान गिरीश चंद्र, सचिव वीर सिंह सेनवाल, कोषाध्यक्ष गोबिंद सिंह रावत, उपकोषाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह राणा, उपनिर्देशक विनीता चौहान, मीडिया प्रभारी प्रमोद रावत, निरीक्षक प्रदीप कठैत एवं कार्यकारिणी सदस्य तुलसी मनराल, ममता देवी, लक्ष्मी रावत, बच्चन सिंह रावत, सौरभ पपनोई, दीपक देवली, जगदीश प्रसाद, कविता मेहरा, पूजा रावत, नन्दी शाही, सरोज बिष्ट, लक्ष्मी रावत आदि मौजूद रहे।

रक्तदान कैंप से पहले मंच के चेयरमैन हरी सिंह भंडारी ने संबोधित करते हुए रक्तदान काे महादान बताया। उन्होंने कहा कि हर किसी को इस नेक काम में आगे आना चाहिए। मंच के मुख्य सलाहकार धीरज सिंह रावत ने बताया कि रक्तदान करने से हमें स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। कौषाध्यक्ष गोबिंद सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि एक व्यक्ति एक बार में केवल एक यूनिट रक्तदान करता है इसलिए किसी भी तरह का कोई डर नहीं है। उन्होंने कहाकि हम तीन महीने बाद रक्तदान दोबारा कर सकते हैं। इस दौरान उपनिर्देशक विनीता चौहान ने सभी को संबोधित करते कहा कि हमें बढ़ चढ़कर रक्तदान में हिस्सा लेना चाहिए ताकि हर जरुरतमंद इंसान की इलाज के दौरान मदद हो सके। अंत में मंच के प्रधान दिनेश सिंह चौहान ने कहा कि हमारा एक रक्तदान किसी जरुरतमंद की जान बचा सकता है। इस लिए हमें रक्तदान जरूर करना चाहिए। प्रधान दिनेश सिंह चौहान ने मंच के सभी पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों और मेंबरों का आभार जताया।

उत्तराखंड हिलांस सांस्कृतिक कला मंच की ओर से आयोजित इस रक्तदान कैंप में मंच की महिला पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी मेंबर्स ने पूर्ण योगदान दिया। राजिंद्रा अस्पताल की ब्लड बैंक टीम ने मंच के सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। काय्रक्रम के अंत में रक्तदानियों को प्रशंसा पत्र आबंटित किए गए। कैंप को सफल बनाने में मेहनत करने वाले माहनुभवों को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया।

उत्तराखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर धामी ने ली शपथ

देहरादून | उत्तराखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को शपथ ले ली है। राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। मुख्यमंत्री की कैबिनेट में 8 मंत्रियों ने प्रधानमंत्री के सामने शपथ ली। इनमें सतपाल महाराज, प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, धन सिंह रावत, रेखा आर्य, चंदन राम दास, सौरभ बहुगुणा शामिल हैं।

मंत्रिमंडल से इन्हें किया बाहर
विधायक विशन सिंह चुफाल और विधायक बंशीधर भगत को मंत्रीमंडल से बाहर कर दिया गया है जबकि प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को भी मंत्री पद नहीं दिया गया।

पुष्पा छोरी पौड़ी खाल की….गीत में पुष्पा छोरी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री रीना रावत का निधन

उत्तराखंड के प्रसिद्ध गायक गजेंद्र राणा के हिट गीत ‘पुष्पा छोरी पौड़ी खाल की….’ में पुष्पा छोरी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री रीना रावत को निधन हो गया है। उत्तराखंड के तमाम कलाकारों ने इस पर शोक जताया है। सोशल मीडिया से मिली जानकारी की बात करें तो अभिनेत्री रीना रावत पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थी और ह्रदय गति रुक जाने से उनकी मृत्यु हो गई। उत्तराखंड फिल्म जगत ने इसे बेहद दु:खद करार दिया। रीना रावत ने फ्योंली ज्वान ह्वे गे जैसी कई गढ़वाली एल्बम में काम किया।

एकता नगर सेवा समिति ने श्री रामयण का अखंड पाठ रखवाया

एकता नगर सेवा समिति संबंधित गढ़मांऊ एकता एवं सेवा समिति, पटियाला की ओर से एकता नगर में श्री रामायण जी का अखंड पाठ रखवाया गया। इस मौके पर श्रीराम संकीर्तन मंडली संयोजक यूके फ्रैंड्स क्लब पटियाला ने श्री रामायण जी के पाठ की समाप्ति के बाद कीर्तन-भजन किया और नगर में भक्ति भाव का माहौल बना दिया। पाठ की समाप्ति के बाद पूरी कॉलोनी के लिए कड़ी-चावल का लंगर भी चलाया गया। कार्यक्रम में भाजपा के जिला प्रधान हरिंदर कोहली विशेष तौर पर पहुंचे। इस मौके पर प्रधान विजय कुमार सकलानी, महासचिव मेहरबान सिंह रावत और समिति के अन्य मेंबर मौजूद रहे।
-आर प्रमोद

दयाल सिंह रावत की रिटायरमेंट पर करवाया श्री रामचरित मानस का पाठ

पौड़ी गढ़वाल सभा के वरिष्ठ सदस्य व वर्तमान निरीक्षक दयाल सिंह रावत बहादुरगढ़, पटियाला स्थित फैडरल मुगल गोइटजे इंडिया, बहादुरगढ़, पटियाला से रिटायर्ड हो गए। इस उपलक्ष्य में उनके निवास स्थान पर श्री रामचरित मानस जी के अखंड पाठ का आयोजन किया गया। सभा की रामायण मंडली ने कीर्तन भी किया। इस मौके पर सभा प्रधान बीरेंद्र पटवाल, संरक्षक रमेश ध्यानी, चंद्रमोहन ढौंडियाल, रामायण मंडली के प्रधान सुल्तान सिंह राणा, मनवर सिंह नेगी, विश्वेश्वर प्रसाद सुंडली और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
-आर प्रमोद

टेक्नोलॉजी: नए गैजेट्स जो जीवन को कर दें आसान

यदि आप बिना िकसी टेंशन के अपने रोजाना के काम बड़ी आसानी और बिना झंझट के पूरा करने के इच्छुक हैं तो आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही एमेजिंग गैजेट्‌स के बारे में, जिन्हें आप हर हाल में हासिल करना चाहेंगे। आई जानें इन दिल छू लेने वाले गैजेट्स के बारे में…

रिमार्केबल: पढ़ने के लिए रीडिंग बुक, लिखने के लिए नोटबुक, स्कैच बनाने के लिए स्कैच पेपर को बाहर निकालें और इसकी जगह रिमार्केबल को अपनाएं, क्योंकि इसमें यह सब सुविधाएं उपलब्ध हैं। रिमार्केबल में कैनवास डिस्पले है, किसी बढ़िया क्वालिटी के पेपर की तरह आप इस पर लिख सकते हैं। इसके पेन के साथ जब आप लिखेंगे तो आपको किसी नोटबुक में लिखने जैसा ही फील आएगा। जिस भी तरह के पेपर टैंपलेंट पर आपको लिखना है बस आप उसे चूज करें और वैसा ही टैंपलेंट आपके सामने लिखने के लिए हाजिर हो जाएगा। रिमार्केबल अपने पास रख लेंगे तो आपको अपने साथ भारी भरकम नोटबुक रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी और न ही नोटबुक को घर जाकर बार-बार बदलने का झंझट रहेगा। इसमें किसी स्कैच की तरह ही आप अपने पैन से स्कैच बना सकते हैं और बढ़िया राइटिंग के साथ लिख सकते हैं। आपके स्कैच और नोट्स सभी को रिमार्केबल संभालकर रख सकता है। इसे आप अपने कंप्यूटर के साथ अटैच भी कर सकते हैं।
Read More

माउंट एवरेस्ट फहत करने के बाद अब ये है शीतल का सपना, पेश करेंगी मिसाल

महिलाओं को सशक्त बनाने का इरादा रखने वाली शीतल ने पिछले साल करीब 23 वर्ष की उम्र में विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा (8586 मीटर) को फतह कर विश्व रिकार्ड बनाकर एवरेस्ट चढ़ने की मंशा जता दी थी। एक मई को दिल्ली से काठमांडू रवाना होते समय अमर उजाला से बातचीत में पहाड़ की इस बेटी ने कहा था कि हर पर्वतारोही की तरह उसका भी सपना माउंड एवरेस्ट पर अपने देश का झंडा फहराना है। साथ ही शीतल ने उम्मीद जताई थी कि उसके कामयाब होने के बाद एडवेंचर टूरिज्म के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।
शीतल ने वर्ष 2014 में एनसीसी ज्वाइन की थी। इस दौरान ही उन्होंने माउंटनेयरिंग के बेसिक गुर सीखे। शीतल ने देश के विख्यात माउंटेनियरिंग संस्थानों से माउंटेनियरिंग का बेसिक और एडवांस कोर्स किया है। एवरेस्ट, कंचनजंगा से पहले शीतल ने सतोपंथ (7075 मीटर), त्रिशूल (7120 मीटर) के साथ कई अन्य पर्वतों का सफलतापूर्वक आरोहण किया है। कंचनजंगा फतह करने के बाद से ही शीतल ने मिशन एवरेस्ट की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने ट्रेनिंग के लिए कुमाऊं की पंचाचूली पर्वत श्रंखला (धारचूला) को चुना था।

एवरेस्टर योगेश गर्ब्याल बताते हैं कि अभ्यास के दौरान शीतल धारचूला की दारमा और व्यास घाटी में 20 किलो सामान के साथ रोजाना 8 से 9 घंटे चलती थीं। शीतल अभियान की तैयारी के लिए इसी साल जनवरी में लेह भी गईं थीं। एवरेस्टर गर्ब्याल ने बताया कि शीतल के साथ वह वर्ष 2017 से कई अभियानों में हिस्सा ले चुके हैं। कंचनजंगा फतह भी उन्होंने साथ किया। शीतल फिजिकली और मेंटली इस (एवरेस्ट) बड़े अभियान के लिए तैयार थी।

दारमा, व्यास घाटी बन सकती है पर्वतारोहण प्रशिक्षण का हब
एवरेस्ट, कंचनजंगा समेत इंडियन हिमालय के कई पर्वतों में देश का झंडा फहरा चुके धारचूला के गर्ब्यांग निवासी योगेश गर्ब्याल कहते हैं कि कुमाऊं माउंटेनियरिंग ट्रेनिंग के अनुकूल है। भविष्य में दारमा और व्यास घाटी पर्वतारोहण अभ्यास का हब बन सकता है। शीतल की सफलता ने इस बात को साबित भी किया है।

शीतल पर्वतारोहण के लिए बच्चों को करतीं है प्रोत्साहित
वर्ष 2018 में शीतल ने कुमाऊं मंडल विकास निगम, रं यूथ फोरम धारचूला और द हिमालयन गोट्स संस्था के साथ मिलकर 350 बच्चों को निशुल्क पर्वतारोहण का प्रशिक्षण दिया था। शीतल समय-समय पर बच्चों को पर्वतारोहण के टिप्स देती रहती हैं।

धारचूला के लाल करते हैं कमाल
पिथौरागढ़ जनपद के सीमांत धारचूला क्षेत्र के दारमा, व्यास और चौंदास घाटी की दो बेटियों सहित पांच पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट फतह करके दिखाया है। इन सभी पर्वतारोहियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत इरादों के बल पर यह कीर्तिमान स्थापित किया है।

धारचूला के व्यास घाटी के गुंजी गांव निवासी पदमश्री मोहन सिंह गुंज्याल, गर्ब्यांग के योगेंद्र गर्ब्याल, चौंदास घाटी के सोसा गांव की कविता बूढ़ाथोकी, दारमा घाटी के सौन गांव के आईटीबीपी में डिप्टी कमांडेंट रतन सिंह सोनाल और सुमन कुटियाल ने एवरेस्ट समेत देश-विदेश की कई चोटियों में तिरंगा फहरा कर देश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। एवरेस्ट विजेता व्यास घाटी की सुमन कुटियाल को वर्ष 1994 में नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

धारचूला में जन्मी रं समाज की महिला चंद्रप्रभा ऐतवाल एवरेस्ट फतह करने में सफल नहीं हो पाईं, लेकिन उनके मार्ग दर्शन में कई पर्वतारोहियों ने इस चोटी पर परचम फहराया। युवा पर्वतारोही योगेंद्र गर्ब्याल का कहना है कि पर्वतारोहण के क्षेत्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है। यदि युवा इसे करियर के रूप में अपनाएं तो उनका भविष्य बेहतर हो सकता है।

सात बार एवरेस्ट फतह कर चुके हैं मुनस्यारी के लवराज
बीएसएफ के सहायक सेनानी एवं मुनस्यारी के बौना गांव निवासी पद्मश्री लवराज धर्मशक्तू सात बार एवरेस्ट फतह कर चुके हैं। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी सागरमाथा में सात बार चढ़ने वाले लवराज भारत के पहले पर्वतारोही हैं। लवराज ने वर्ष 2018 में सातवीं बार एवरेस्ट फतह किया। खास बात यह है कि सात बार एवरेस्ट फतह करने वाले लवराज बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट चढ़ चुके हैं। लवराज ऐसे पर्वतारोही जिन्होंने चारों दिशाओं की तरफ से एवरेस्ट चढ़ने में सफलता हासिल की है। लवराज वर्ष 1998 में पहली बार एवरेस्ट में चढ़े थे। बीएसएफ में जाने के बाद वर्ष 2006, 2009, 2012, 2013, मई 2017 और ठीक एक साल बाद मई 2018 में सातवीं बार एवरेस्ट फतह किया था।
-साभार: अमर उजाला