हिमालय की एक कथा: अजुआ बफौल

हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच, बहुत समय पहले, पांच देवता एक यात्रा पर निकले। विश्राम के दौरान उन्होंने मनोरंजन के लिए मिट्टी के चार गोले बनाए और उन्हें चार दिशाओं में फेंक दिया। इन गोलों से चार विशाल और बलशाली योद्धा प्रकट हुए। इन योद्धाओं ने देवताओं से अपनी उत्पत्ति का कारण पूछा। देवताओं ने हंसते हुए कहा, “हम तो बस खेल रहे थे, उसी में तुम बन गए।” योद्धाओं ने कार्य मांगा, तो देवताओं ने कहा, “जाओ, दुनिया घूमो, अपनी शक्ति का परिचय दो।”

चारों योद्धा निकल पड़े और हर जगह के शक्तिशाली मल्लों को हराकर वापस लौटे। थकान और भूख से परेशान, उन्होंने देवताओं से भोजन की मांग की। देवताओं ने कहा, “हम तो साधु हैं, भिक्षा पर जीते हैं। तुम चंपावत के राजा कालीचंद्र के पास जाओ, वहां तुम्हें सब मिलेगा।”

कालीचंद्र के दरबार में बाइस बफौल भाई रहते थे—बलवान और एकजुट। उनकी पत्नी दूधकेला से उनका गहरा प्रेम था, जो पूरे राज्य में प्रसिद्ध था। लेकिन रानी को यह प्रेम खटकता था। उसने बफौल भाइयों को अपने अधीन करना चाहा, पर वे नहीं माने। क्रोध और भय से उसने राजा से झूठ कहा कि बफौल उस पर बुरी नजर रखते हैं। गुस्से में राजा ने बफौलों को मृत्युदंड सुना दिया।

उसी समय चार योद्धा दरबार में पहुंचे। राजा ने शर्त रखी, “बाइस बफौलों का सिर लाओ, तो तुम्हें जगह दूंगा।” चारों ने युद्ध किया और बफौल भाइयों को मार डाला। दूधकेला अपने पतियों की मृत्यु से टूट गई और सती होने को तैयार हुई। तभी उसके गर्भ से आवाज आई, “मां, मुझे भी जीने दो।” बच्चे की बात सुन उसने इरादा बदल दिया।

समय बीता, दूधकेला ने एक पुत्र को जन्म दिया—अजुआ बफौल। वह बड़ा हुआ और उसकी ताकत की चर्चा चारों ओर फैली। जब उसे पता चला कि चार योद्धा उसके पिता के हत्यारे हैं, जो गांव वालों को भी तंग करते हैं, तो उसने उन्हें चुनौती दी। भीषण युद्ध में अजुआ ने चारों को हरा दिया। फिर उसने राजा को रानी की साजिश बताई। सच सामने आया, रानी दासी बनाई गई, और अजुआ बफौल की वीरता अमर हो गई।

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